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पूज्य रब का अपने सभी गुणों में परिपूर्ण होना आवश्यक है

Non Muslim · 3 - 6

हमारे सृष्टिकर्ता ने हमें ऐसी अक़्लें (विवेक) दीं, जो उसकी महानता को महसूस कर सकें और ऐसा स्वभाव प्रदान किया, जो उसकी संपूर्णता को प्रमाणित करता है और बताता है कि उसके अंदर किसी कमी का पाया जाना संभव नहीं है। इबादत केवल अल्लाह ही की होनी चाहिए। क्योंकि वही संपूर्ण है और एकमात्र इबादत का हक़दार है। उसके सिवा किसी और की इबादत उचित नहीं है। क्योंकि उसके सिवा कोई संपूर्ण एवं परिपूर्ण नहीं है। सबको मौत आनी है और फ़ना हो जाना है। इन्सान, बुत, पेड़ या जानवर का पूज्य पालनहार होना असंभव है। किसी समझदार व्यक्ति के लिए उचित नहीं है कि वह संपूर्ण हस्ती के अतिरिक्त किसी और की इबादत करे। ऐसे में अपनी ही जैसी या अपने से कमतर किसी अपूर्ण सृष्टि की इबादत भला कैसे उचित हो सकती है? पालनहार किसी औरत के पेट में भ्रून बनकर रह नहीं सकता और बच्चों की तरह पैदा नहीं हो सकता। पालनहार ही ने सारी सृष्टियों की रचना की है और सारी सृष्टियाँ उसके मातहत तथा उसके अधीन हैं। अतः कोई इन्सान उसे नुक़सान नहीं पहुँचा सकता। उसे सूली पर चढ़ाना, यातना देना और अपमानित करना किसी के लिए संभव नहीं है।